श्री हनुमान जयंती पर आइए जानते हैं : श्री संकट मोचन हनुमान जी की जन्म से संबंधित दो कहानियों का वृतांत-

श्री हनुमान जयंती पर आइए जानते हैं : श्री संकट मोचन हनुमान जी की जन्म से संबंधित दो कहानियों का वृतांत-

आइए जानें साल में दो बार क्यों मनाते हैं, हनुमानजी का जन्मोत्सव:

प्रस्तुति : गौरव अवस्थी, वरिष्ठ पत्रकार व वरिष्ठ संरक्षक, अम्बालिका न्यूज, की कलम से;

यूपी डेेस्क, लखनऊ/रायबरेली (यूपी) :

🚩🚩 श्री हनुमान जयंती आज 🚩🚩

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को प्रदोष काल में माता अंजना देवी के गर्व से श्री हनुमान जी का जन्म हुआ. इसीलिए इस दिन उनकी जयंती मनाई जाती है. आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी है. यानी हनुमान जयंती. इस पावन अवसर पर श्री हनुमान जी की दो जन्म कथाएं पढ़िए :

🏵 श्री हनुमान जी के जन्म के दो वृत्तांत 🏵

“पवनतनय” श्री हनुमान-

परम रूपवती पुंजिकस्थला नाम की एक लोक विख्यात अप्सरा थी. उसी ने ऋषि के शाप से कामरूपिणी वानरी होकर पृथ्वी पर जन्म ग्रहण किया था. वही कपिश्रेष्ठ केसरी की मां होकर अंजना के नाम से विख्यात हुई. पर्वत श्रेष्ठ सुमेरु पर केसरी राज्य शासन करते थे. अंजना उनकी एक प्रियतमा पत्नी थी. वानर पति केसरी और अंजना दोनों एक दिन मनुष्य का वेश धारण कर पर्वत शिखर पर बिहार कर रहे थे. अंजना का मनोहर रूप देखकर पवन देव मोहित हो गए और उन्होंने उनका आलिंगन किया. साधु चरित्र अंजना ने आश्चर्यचकित होकर कहा-” कौन दुरात्मा मेरा पतिव्रता धर्म नष्ट करने को तैयार हुआ है. मैं अभी शाप देकर उसे भस्म कर दूंगी.” सती साध्वी अंजना की यह बात सुनकर पवन देव ने कहा- “मैंने आपका पति व्रत धर्म नष्ट नहीं किया है. मैंने मानसिक स्पर्श किया है उससे आपको एक पुत्र होगा जो शक्ति एवं पराक्रम में मेरे समान होगा भगवान का सेवक होगा और बल बुद्धि में अनुपमेय होगा मैं उसकी रक्षा करूंगा”

इस प्रकार भगवान शंकर ने आंशिक रूप से वायु का माध्यम लेकर अंजना के गर्भ से पुत्र उत्पन्न किया जो भविष्य में “पवनतनय” कहलाए.

“शंकर सुवन” श्री हनुमान-

शिव पुराण के अनुसार, एक समय भगवान शिव को भगवान विष्णु के मोहिनी रूप का दर्शन प्राप्त हुआ. उस समय ईश्वर इच्छा से राम कार्य की सिद्धि हेतु उनका वीर्य स्खलित हो गया. उस वीर्य को सप्त ऋषियों ने सुरक्षित रख लिया. उन्होंने ही शिव की प्रेरणा से उस वीर्य को गौतम कन्या अंजना में कान के रास्ते स्थापित किया. समय आने पर उस गर्भ से वानर शरीरधारी महा पराक्रमी पुत्र का जन्म हुआ जो भविष्य में शंकर सुवन श्री हनुमान के नाम से विश्व में विख्यात हुए.

@ आइए जानें साल में दो बार क्यों मनाते हैं, हनुमानजी का जन्मोत्सव:

भगवान श्रीराम के परमभक्त हनुमानजी को माता सीता ने अमर रहने का वरदान दे दिया था। ऐसा माना जाता है कि जहां भी सुंदरकांड का पाठ विधि-विधान से होता है, वहां हनुमानजी अवश्य पहुंचते हैं। वे जल्द ही अपने भक्तों की सभी परेशानियों को हल भी कर देते हैं। जब भक्त की परेशानियां दूर हो जाती हैं, तब श्रद्धालु हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़ाते हैं।
www.ambalikanews.com आज आपको बताने जा रहा है कि हनुमान जयंती पर ऐसी बातें जिससे भगवान प्रसन्न होते हैं और आपकी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं। भोपाल के कथा वाचक पं. वल्लभानंद शुक्ल बता रहे हैं कि हनुमानजी की वर्ष में दो बार जयंती मनाई जाती है…।
सिंदूर चढ़ाने की यह है कहानी : धार्मिक मान्यता यह है कि वायु पुत्र हनुमान को सिंदूर अर्पित करने से वे बेहद प्रसन्न हो जाते हैं। हनुमानजी को सिंदूर का चोला चढ़ाने की यह कथा प्रचलित है।
एक दिन पवन पुत्र हनुमानजी ने सीता माता को मांग में सिंदूर लगाते हुए देख लिया, तो वे जिज्ञासावश उनसे पीछ बैठे कि माता आप अपनी मांग में सिंदूर क्यों लगा रही हैं। इस पर माता सीता ने हनुमान को बताया था कि इससे मेरे स्वामी श्रीराम की आयु और सौभाग्य बढ़ता है। यह सुनकर हनुमानजी ने सोचा कि यदि चुटकीभर सिंदूर से श्रीराम की उम्र और सौभाग्य बढ़ता है, क्यों न मैं पूरे शरीर पर ही सिंदूर लगाउंगा तो मेरे श्रीराम हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाएंगे और उनकी कृपा मुझ पर हमेशा बनी रहेगी।
इसके बाद हनुमानजी अपने पूरे शरीर पर सिंदूर लगाने लगे। तो हनुमानजी की श्रीराम के प्रति भक्ति देख सीतामाता ने उन्हें अमर रहने का वरदान दिया था। हनुमानजी को यह वरदान दीपावली के दिन मिला था। इसलिए हनुमानजी दीपावली के दिन भी मानी गई है। यानी वर्ष में दो बार हनुमानजी की जयंती मनाने की परंपरा है।

🙏🙏🙏 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏आप सब भक्तों से प्रार्थना है कि शील-विनय-बुद्धि-विवेक एवं अतुलित बल धारण करें। ऐसे पराक्रमी राम काज में जीवन समर्पित करने वाले श्री हनुमान जी महाराज का आज विशेष स्मरण करें
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(नोट : यह लेखक के अपने विचार हैं।)

सादर साभार:

*के. के. सिंह सेंगर, सीतापुर (यूपी)

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