नेपाल में कुछ अलग तरीक़े मनाया जाता है दशहरा, यहां दशानन का दहन नहीं बल्कि पशुओं की दी जाती है बलि

नेपाल में कुछ अलग तरीक़े मनाया जाता है दशहरा,
यहां दशानन का दहन नहीं बल्कि पशुओं की दी जाती है बलि

उषा किरण ज्योति/मोहित शुक्ल, अम्बालिका न्यूज डेस्क, लखनऊ (यूपी): अपने पड़ोसी देश नेपाल में विजय दशमी का पर्व एक अलग अंदाज में मनाया जाता है। यहां पर लंकापति रावण का दहन नहीं बल्कि पशुओं की दी जाती है बलि। पेश है नेपाल से उषा किरण ज्योति/मोहित शुक्ल की ख़ास रिपोर्ट:

यहां भी मां दुर्गा की पूजा अर्चना होती है। लोग एक दूसरे के घर जाकर इस त्योहार को बड़े ही धूम धाम से मनाते हैं। लेकिन इसे यहाँ बड़ा दशै के नाम से जानते हैं। दस दिनों तक चलने वाले इस उत्सव में नेपाली लोग माँ भगवती की पूजा करते हैं। नेपाली दशहरे की एक ख़ास बात होती है कि वहां इस मौके पर पशुओं की बलि चढ़ाई जाती हैॉ। इसके चलते बकरे, भैंसे, बत्तखों की ख़ूब बिक्री होती है।

इस उत्सव के दौरान कलाकार कई तरह के मास्क बना कर उसे बेचते हैं। परंपरागत तौर पर ऐसे मास्क नेपाली लोगों में ख़ूब लोकप्रिय हैं। नेपाल के इस दशहरे में धार्मिक गुरु या पुजारी भी विभिन्न तरह से पूजा अर्चना में शामिल होते हैं। यहां भी इस पर्व को बुराई पर अच्छाई के विजय के रूप में देखा जाता है। इस मौके पर शक्ति की देवी काली की भी पूजा होती है। माना जाता है कि ये नेपाल का सबसे बड़ा त्योहार होता है। भारत की तरह नेपाल के दशहरे में मां दुर्गा की पूजा अर्चना होती है। ज़ाहिर है नेपाल एक हिंदू राष्ट्र है और इसके चलते हिंदू धर्म के पर्व त्योहार यहां खूब हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं।

आपको बता दे कि काठमांडू में इसका रूप कुछ और भव्य हो जाता है राजकीय समारोहों से।

जमरा लगा कर बड़े बुजुर्ग करते है टीका :

बडा दशै के दिन घर परिवार के जो बड़े बुजुर्ग होते है। वो लोग कान पे जमरा लगा कर के मस्तक पर कुमकुम का टीका लगते है और भेटि में आशीर्वाद स्वरूप फल व दक्षिणा देते है।

* (यह रिपोर्ट उषा किरण ज्योति, पत्रकार बिटीवी धनगढ़ी नेपाल व पत्रकार मोहित शुुक्ल के नेपाल भ्रमण कर भेेजी गई  है।)

मोहित शुक्ल, पत्रकार

 

पत्रकार, उषा किरण

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