जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो सुरक्षा कहां संभव है: कुलपति

जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो सुरक्षा कहां संभव है: कुलपति

भारत रत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 118वीं जयंती जेपीयू में श्रद्धा पूर्वक मनी

रिपोर्ट: प्रो. अजीत कुमार सिंह सेंगर/संजय पांडेय, अम्बालिका न्यूज ब्यूरो,
छपरा (सारण ): जब रक्षक ही भक्षक बन जाए तो सुरक्षा कहां संभव है। उक्त बातें जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा के कुलपति प्रो फ़ारुक़ अली ने लोकनायक जयप्रकाश नारायण की की 118वीं जयंती समारोह में अपने अध्यक्षीय सम्बोधन में कहा। कुलपति ने कहा कि हम जिस अपराध की शिकायत जिससे करने जाते हैं। वह खुद उसी में लिप्त है तो फिर निवारण कैसे होगा। उदाहरण के रूप में हम 1961 में बने ‘दहेज निषेद कानून’ को देख सकते हैं। कुलपति अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि जब विद्या मंदिर में भ्रष्टाचार प्रवेश कर जाए तब कोई भी सेवा सार्थक नहीं हो सकता क्योंकि सभी सेवक विद्या के मंदिर से ही निकलते हैं। आज लगभग हर शिक्षण-संस्थानों में भ्रष्टाचार प्रवेश कर चुका है और इसी के विरुद्ध लोकनायक ने बिगुल फूँका था। यह सुधार सामाजिक परिवर्तन के बिना सम्भव नहीं है। कुलपति ने लोकनायक सम्बन्धित संस्मरण साझा करते हुए बताया कि 1977 में केंद्र की सरकार बदलने के बाद राजघाट, दिल्ली स्थित गाँधी की समाधि के समक्ष जब वे कुर्सी पर बैठे तो मैंने अपने कैमरे से तस्वीर खींचा और उनके साथ खिंचवाया भी।
यह जयंती समारोह रविवार को जय प्रकाश विश्वविद्यालय, छपरा की ओर से 11 बजे पूर्वाह्न में कुलपति प्रो फ़ारुक़ अली की अध्यक्षता में भारतरत्न लोकनायक जयप्रकाश नारायण की 118वीं जयंती सीनेट हॉल में आयोजित किया गया। सर्वप्रथम विश्वविद्यालय परिसर स्थित प्रसाशनिक भवन के सम्मुख लोकनायक की आदमकद प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सादर नमन किया। सीनेट हॉल में कार्यक्रम की शुरुआत लोकनायक के तैलचित्र पर कुलपति सहित हॉल में उपस्थित सभी जन के द्वारा पुष्प अर्पित के साथ हुई।कार्यक्रम की अगली कड़ी के रूप में जय प्रकाश महिला महाविद्यालय की छात्राओं (प्रिया रानी, पूर्णिमा आर्या, प्रियंका भारती, ज्योति कुमारी एवं लक्ष्मी) द्वारा बहुत सुंदर तरीके से मधुर ‘कुलगीत’ प्रस्तुत किया गया।

कार्यक्रम के स्वागत संबोधन में कुलसचिव रिटायर्ड ग्रुप कैप्टन श्री कृष्ण ने कहा कि लोकनायक कभी भी किसी पद की लालसा मन में नहीं पाले। कबीरदास की पंक्ति ‘वृक्ष कबहुँ नहि फल भखै, नदी न संचै नीर। / परमारथ के कारने, साधुन धरा सरीर।’ को सार्थक करने उनका व्यक्तित्व रहा है। हम सभी को उनके बताए मार्गों का अनुसरण आगे बढ़ना चाहिए। सभा मे विषय-प्रवेशीय सम्बोधन में राजेंद्र महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो प्रमेन्द्र रंजन सिंह ने लोकनायक के पारिवारिक पृष्ठभूमि एवं जीवन-दर्शन पर क्रमिक प्रकाश डालते हुए बताया कि आज जो भी बिहार के प्रतिष्ठित व प्रभावशाली नेता हैं, वे सब जयप्रकाश के आंदोलन की उपज हैं। परिसंपदा पदाधिकारी प्रो रवीन्द्र कुमार सिंह ने कहा कि जयप्रकाश जैसे लोग सदियों एकाध पैदा होते हैं। हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ अजय कुमार ने सम्पूर्ण क्रांति को देश के आजादी की दूसरी लड़ाई बताया। जय प्रकाश महिला महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो मधुप्रभा सिंह ने जयप्रकाश नारायण के नाम की सार्थकता पर प्रकाश डाला। पीआरओ प्रो हरीश चंद्र द्वारा संचालित कार्यक्रम में गंगा सिंह महाविद्यालय की प्राचार्या प्रो इन्दु सिंह, डॉ आशा रानी, सहायक पीआरओ डॉ दिनेश पाल, आईटी इंचार्ज असि. प्रो धनजंय कुमार आज़ाद, डॉ अनुपम कुमार सिंह, डॉ मंजुलता, सुनील कुमार, विवेक कुमार, धनंजय कुमार, प्रमोद कुमार आदि कार्यक्रम में उपस्थित रहे। तुलसीदास द्वारा रचित ‘पर उपदेश कुशल बहुतेरे/ जे आचरहिं ते नर न घनेरे।’ पंक्ति के उद्धरित करते हुए कुलसचिव ने धन्यवाद ज्ञापन किया। समारोह का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।

(Edited by: Kamal)

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*