लचर सरकार, पंगु संस्थान तथा दिशाहीन स्वाभिमान!! आखिर कैसे बनेगा हमारा भारत महान?

लचर सरकार, पंगु संस्थान तथा दिशाहीन स्वाभिमान!! आखिर कैसे बनेगा हमारा भारत महान?

प्रस्तुति: मनोज कुमार सिंह, अम्बालिका न्यूज सेंट्रल डेस्क,

होठों पे सच्चाई रहती है जहां दिल में सफाई रहती है हम उस देश के वासी हैं। हम उस देश के वासी हैं जिस देश में गंगा बहती है।

मनोज कुमार सिंह: पत्रकार

दशकों पुराने बहुचर्चित इस गीत की बानगी को परिभाषित करें तो वर्तमान भारत का परिदृश्य साक्षात उपस्थित हो जाता है। कांग्रेस ने लगभग 70 वर्षों के अपने शासन काल में देश की गरिमा को ऊंचाई देने का बहुत हद तक प्रयास किया। इस क्रम में देश के लोगों ने अनेक उतार चढ़ाव का दौर देखा। जिस देश की जनता ने आजादी की लड़ाई से लेकर आजाद भारत के सात दशकों तक शासन पर भरोसा किया। उसी कांग्रेस के चंद स्वार्थी नेताओं तथा पार्टी की शुरू हुई वंशवादी परम्परा ने आजादी दिलाने वाली पार्टी को हासिये पर ला खड़ा किया। बावजूद इसके इस कड़वी सच्चाई से इनकार नही किया जा सकता की घोटालों की अनगिनत सृंखला से घिरी पार्टी ने अपने शासन काल में देश बिकने की नौबत न आने दी। वैश्विक उतार चढ़ाव में भी अर्थ ब्यवस्था विदेश नीति तथा बेरोजगारी पर काबू करने का जोरदार प्रयास किया। बावजूद इसके कई मामलों में सरकारें विफल भी रहीं। वर्ष 1974 का आपातकाल कांग्रेस के लिए काला अध्याय साबित हुआ। हालाँकि असफलता के आरोपों के बावजूद उद्योगों के विकास में कांग्रेस का प्रयास बहुत हद तक सकारात्मक रहा।
यह भी कटु सत्य है कि जिस संगठन ने आजादी की लड़ाई में दूर दूर तक भगीदारी निभाना तक मुनासिब नही समझा और यह भी एक संयोग ही है कि कांग्रेस की नाकामी की वजह से वह संगठन आज सत्ता के शीर्ष पर पहुंच कर देश भक्ति का मानक तय कर रहा है। बेरोजगारी अपने चरम पर है। अर्थब्यवस्था रसातल में चली गई इससे इनकार नही किया जा सकता। मौनमोहन सिंह की रिमोट कंट्रोल वाली सरकार का विरोध कर सत्ता पाने वाली सरकार अंबानी अडानी जैसे नौरत्नों के गोद में पता नही खेल रही है या की सु सु कर रही है। पाकिस्तान को सबक सिखाने का शंखनाद करने वाले तथा बहुसंख्यक मतदाताओं का समर्थन पाने वाली सरकार की रहनुमाई में नेपाल और भूटान जैसे देश भी आंख दिखा रहे हैं। देश किस रास्ते कहाँ जा रहा है।
बिहार का चुनाव सामने है। एक तरफ तथाकथित जंगलराज तक बिहार को ले जाने के आरोपों से घिरा महा गठबंधन तथा दूसरे तरफ कथित रूप से मंगलराज और सुशासन का दावा करने वाले संगठन एक बार फिर आमने सामने हैं। तीन दशकों से दोनों गठबंधनो ने बिहार का कितना कायाकल्प किया जनता इनसे सख्ती पूर्वक हिसाब ले रही है। करोड़ों बेरोजगारों के इस बिहार में दोनों खेमों के सांसद विधायक बेआबरू हो रहे हैं। कोरोना संक्रमण काल का दर्द और बाढ़ पीड़ितों का आक्रोश खुल कर अपना रंग दिखा रहा है। आसन्न चुनाव में विगत चुनाव प्रचार के दौरान घोषित पैकेज को बिहार के लोग ढूंढ रहे हैं। बिहार को विशेष राज्य के दर्जे की डपोरशंखी मांग को लोग खोद कर बाहर निकाल रहे हैं। अनमोल रत्नों से भरी पड़ी बिहार की धरती दुर्भाग्य का द्योतक बन चुकी है। इस प्रदेश की दिशाहीन हो चुकी सामाजिक तारतम्यता को आध्यात्मिक दूरदृष्टि की आवश्यकता है। बिहार के मतदाता दल के दलदल से निकल कर अच्छे उम्मीदवारों का चयन करें। भारत की जनता के पास अब यही एकमात्र रास्ता बचा है शेष। अन्यथा नही बचेगा विश्वगुरु भारत का अवशेष। नमस्कार। आभार।
सौजन्य:
मनोज कुमार सिंह
राष्ट्रीय प्रवक्ता
एबीपीएसएस

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