राजापुर को पर्यटन स्थल घोषित कर गोस्वामी तुलसीदास के नाम पर देवीपाटन मंडल में विश्वविद्यालय खोले सरकार: भगवदाचार्य

राजापुर को पर्यटन स्थल घोषित कर गोस्वामी तुलसीदास के नाम पर देवीपाटन मंडल में विश्वविद्यालय खोले सरकार: भगवदाचार्य
रिपोर्ट : प्रदीप पांडेय, अम्बालिका न्यूज ब्यूरो,

गोण्डा (यूपी) : श्री रामचरितमानस के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि राजापुर को पर्यटन स्थल घोषित करते हुए उनके नाम पर एक विश्वविद्यालय खोलने की मांग जोर पकड़ने लगी है। तुलसी जन्मभूमि न्यास के अध्यक्ष डाक्टर स्वामी भगवदाचार्य ने प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ व पर्यटन मंत्री रीता बहुगुणा जोशी को पत्र लिखकर जन्म स्थान के विकास की मांग की है।

ख़ारिज हो चूका है एटा का दावा :

शहीदे आजम सरदार भगत सिंह इंटर कालेज सभागार में पत्रकारों से वार्ता करते हुए डा. भगवदाचार्य ने बताया कि बीते 23 जुलाई को एटा में आयोजित मुख्यमंत्री के एक कार्यक्रम में स्थानीय नेताओं व अधिकारियों ने उन्हें गुमराह करके कासगंज के सोरों को गोस्वामी तुलसीदास की जन्मस्थली मानकर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किए जाने की घोषणा करवा लिया। जबकि गोण्डा जिले में सू्करखेत के निकट स्थित राजापुर गोस्वामी तुलसी दास की जन्मस्थली के रूप में काफी पहले स्थापित हो चुका है। उन्होंने बताया कि 31 मई 1960 को दिल्ली विश्वविद्यालय में आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में आचार्य विश्वनाथ प्रसाद मिश्र, डा. नागेन्द्र सरीखे विद्वानों ने एटा का दावा पूर्णतः खारिज कर दिया है। इसी प्रकार 26 दिसम्बर 2005 को महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ वाराणसी में तत्कालीन कुलपति प्रोफेसर सुरेन्द्र सिंह कुलपति की अध्यक्षता में आयोजित चतुर्थ विश्व तुलसी सम्मेलन में सर्वसम्मति से गोण्डा के राजापुर को गोस्वामी तुलसीदास की जन्मभूमि के रूप में स्वीकार किया गया।

सपा सरकार दे चुकी है 20 लाख का अनुदान :

डा. भगवदाचार्य ने कहा कि अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार ने भी पयागपुर के तत्कालीन विधायक मुकेश श्रीवास्तव द्वारा विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने जन्मभूमि के विकास के लिए बीस लाख रुपए देने की घोषणा की थी। युग तुलसी पंडित राम किंकर जी, जगद्गुरु शंकराचार्य, स्वामी बासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु हर्याचार्य, स्वामी नृत्य गोपाल दास, मोरारी बापू, अनूप जलोटा जैसी विभूतियां भी यहां आकर गोस्वामी तुलसीदास व पास के सूकरखेत में स्थित उनके गुरु नरहरिदास का दर्शन कर चुकी हैं।

तुलसी विश्वविद्यालय खोलने की मांग :
डा. भगवदाचार्य ने सरकार से मांग किया कि गोण्डा जिले में गोस्वामी तुलसीदास के नाम पर एक विश्वविद्यालय खोला जाय। साथ ही उनकी जन्मभूमि को पर्यटन स्थल घोषित करते हुए उसका विकास कराया जाय। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के लगभग सभी मण्डलों में विश्वविद्यालय संचालित हैं। जबकि देवीपाटन मण्डल में अभी एक भी विश्वविद्यालय संचालित नहीं है। इस मण्डल के कालेज अवध विश्वविद्यालय फैजाबाद के अधीन हैं। जिनकी संख्या निर्धारित मानक से कई गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि उच्च शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के उद्देश्य से भी देवीपाटन मण्डल मुख्यालय पर एक विश्वविद्यालय खोला जाना आवश्यक है। मण्डल के जिलों में पूर्व से ही एक विश्वविद्यालय खोलने की न्यूनतम संख्या से अधिक कालेज संचालित हैं। उन्होंने इस बात पर क्षोभ व्यक्त किया कि सम्पूर्ण विश्व को राम चरित मानस जैसा अद्वितीय ग्रंथ देने वाले संत की जन्म स्थली आज भी पूरी तरह से उपेक्षित है। डा. भगवदाचार्य ने कहा कि इसके लिए देवीपाटन मण्डल समेत आसपास के जिलों में जन जागरण अभियान चलाया जाएगा। इस क्रम में क्षेत्रीय सांसदों व विधायकों को ज्ञापन देना भी शामिल है। इसके बाद भी सरकार न चेती तो लोकतांत्रिक तरीके से आन्दोलन किया जाएगा। डा. भगवदाचार्य ने नगर के फव्वारा चैराहा का नाम तुलसी चैराहा और जिला पंचायत सभागार का नाम तुलसी सभागार किए जाने की भी मांग की।

शासन में दबा पड़ा है पुलिस चौकी खोलने का प्रस्ताव:

डा. भगवदाचार्य ने आरोप लगाया कि शासन में बैठे वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा जन्म स्थली की उपेक्षा की जा रही है। पूर्ववर्ती सरकार में 24 जनवरी 2015 को पुलिस मुख्यालय इलाहाबाद द्वारा तुलसी जन्मभूमि राजापुर में एक पुलिस चैकी खोलने का प्रस्ताव गृह विभाग को भेजा गया था। किन्तु शासन में बैठे अधिकारियों ने उस प्रस्ताव पर अब तक कार्रवाई नहीं की है। पुलिस चैकी न होने की वजह से अराजक तत्वों द्वारा वहां की स्थायी परिसम्पत्तियों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने स्थल के विकास के लिए जन सहयोग की भी अपील की। इस मौके पर श्रमजीवी पत्रकार यूनियन के जिलाध्यक्ष कैलाश नाथ वर्मा और उत्तर प्रदेश जर्नलिस्ट एसोसिएशन (उपजा) के जिला महामंत्री हेमंत पाठक ने पांच-पांच हजार रुपये की सहायता संगठन की ओर से देने की घोषणा की। इस मौके पर डा. मिथिलेश मिश्र, शिवाकांत मिश्र विद्रोही आदि उपस्थित रहे।

@ प्रस्तुति : राजन कुशवाहा, गोंडा

 

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