सारण : नहीं रहे विश्व युद्ध विजेता सूबेदार सुखलाल सिंह!!

सारण : नहीं रहे विश्व युद्ध विजेता सूबेदार सुखलाल सिंह!!

– पार्थिव शरीर डुमाईगढ़ स्थित सरयु नदी के घाट पर पंचतत्व में विलीन!

– गाजे-बाजे के साथ निकली अंतिम यात्रा

रिपोर्ट : वी. के. सिंह कौशिक, अम्बालिका न्यूज डेस्क,
छपरा/मांझी (सारण) : मांझी प्रखंड के गोबरही पंचायत के चंदउपुर गांव निवासी और सेवानिवृत सेना के जवान हवलदार श्रीकान्त सिंह के पिता सेवानिवृत्त सूबेदार सुखलाल सिंह की हृदय गति रुकने से निधन हो गया। वह लगभग 85 वर्ष के थे। वह बीते एक वर्ष से बीमार चल रहे थे। वह अपने पीछे पुत्र, पुत्री, पुत्रवधू, पौत्र सहित भरा पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके निधन की सूचना मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार सरयु नदी के डुमाईगढ़ स्थित घाट पर किया गया, जहां पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गया।


इस संबंध में सेना के सेवानिवृत्त हवलदार श्रीकान्त सिंह ने अम्बालिका न्यूज ब्यूरो को एक भेंट वार्ता में जानकारी देते हुए बताया कि मेरे पिता सुखलाल सिंह 1940 में भारतीय सेना में भर्ती हुए थे। दो विश्व युद्धों के दौरान पाकिस्तान, बांगला देश और चाइना के साथ हुए युद्ध के दौरान विजेता रह चुके थे। उनके पार्थिव शरीर को आदर्श ग्राम योजना के ओम सांई अंतिम यात्रा रथ से डुमाईगढ के सरयु नदी घाट पर सैकड़ों लोगों की भीड़ के बीच गाजे-बाजे के साथ पहुंचे। जहां उनके पुत्र सेवानिवृत्त हवलदार श्री कान्त सिंह ने मुखाग्नि दिया।
इस मौके पर अशोक सिंह, स्वामी नाथ सिंह, उपेंद्र सिंह, उमेश सिंह, संदीप कुमार, पूर्व शिक्षक ललन सिंह आदि काफी लोग मौजूद थे।

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