सारण : बारावफात पर सजीं महफिलें, निकाला गया जुलूस

सारण : बारावफात पर सजीं महफिलें, निकाला गया जुलूस

मांझी के साधपुर गांव में निकला जुलूसे मोहम्मदी,

सभी समुदायों के लोगों ने शामिल होकर पेश की आपसी सौहार्द व भाईचारे की मिशाल

गंगा-जमुनी तहजीब की दिखाई दी तस्वीर

रिपोर्ट : के. के. सिंह/वीरेश सिंह/वीरेंद्र कुमार यादव/तारकेश्वर प्रसाद, अम्बालिका न्यूज डेस्क,
छपरा/मांझी/एकमा (सारण) : पैगंबरे इस्लाम हजरत मुहम्मद सलल्लाहु अलैहिस्सलाम की यौमे पैदाईश पर रविवार को एकमा और मांझी इलाके के साधपुर सहित विभिन्न गांवों में भी मुस्लिम समुदाय के लोगों द्वारा जुलूस निकाला गया। इसमें सभी समुदाय के लोगों ने शामिल होकर गंगा-जमुनी तहजीब की सांप्रदायिक सौहार्द व आपसी भाईचारे की मिशाल पेश की।


मांझी प्रखंड के गोबरही पंचायत के साधपुर गांव और आसपास के क्षेत्रों के मस्जिदों और गांवों में महफिलें सजीं। इन महफिलों में उलेमा-ए-दीन ने पैगंबरे इस्लाम की शीरत बयां कर मुस्लिमों को दीन और इस्लाम के रास्ते पर चलने की नसीहत दी।

इस जुलूस में साहब अंसारी, शवीव अंसारी, गफूर अंसारी, हरि किशोर गिरि, अधिवक्ता इज़राइल अंसारी आदि अनेक लोग शामिल हुए।
उल्लेखनीय है कि जुलूस के अलावा कई सड़कों पर रंगीन रोशनी की झालरें सजाई गई। बताया गया कि मस्जिद में भी फजिर की नमाज के बाद तबर्रुकात की जियारत शुरू हुई जो दोपहर तक चली। यहां महफिले मीलाद भी सजी। महफिल खिताब और नातिया कलाम पेश किए गए। दिन में घरों में नजर-नियाज कराई गई। महफिले मीलाद भी सजी। वहीं, रविवार को दिन में जुलूस निकाला गया।
साल के सभी 12 महीनों में हर माह कोई न कोई मुस्लिम त्योहार होता है। लेकिन इस माह यानी ईदमिलादुन्नबी (बारावफात) अन्य त्योहारों से अफजल (खास) माना जाता है। इसका कारण यह है कि इस माह की चाँद की 12 तारीख को इस्लाम मजहब के बानी हजरत मोहम्मद साहब की पैदाईश हुई और इसी रबी उल अव्वल को इस दुनिया से रुखसत भी हुए।

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