सारण : हरितालिका तीज आज, जानें व्रत विधान व इससे जुड़ी कथा!!

सारण : हरितालिका तीज आज, जानें व्रत विधान व इससे जुड़ी कथा!!

रिपोर्ट : मनजीत नारायण सिंह, अम्बालिका न्यूज ब्यूरो,

छपरा/रिविलगंज (सारण) : तीज व्रत पुर्व नहाय खाय के अवसर पर रविवार को व्रतियों ने पवित्र स्नान के बाद इष्ट देव की पुजा अर्चना कर शुद्ध भोजन ग्रहण किया। सोमवार को निर्जला व्रत करेंगी व्रती। हिन्दू धर्म में पति की लंबी आयु के लिए सुहागिन स्त्रियां और मनचाहा सुन्दर एवं सुयोग्य वर पाने के लिए कुंवारी कन्याएं भी हरतालिका तीज का व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएं पुरे दिन निर्जला व्रत रखकर पुरे विधि- विधान से भगवान शिव और माता पार्वती जी की आराधना करते हैं।

आचार्य

मान्यता है कि भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए पार्वती जी ने विवाह से पहले यह व्रत रखा था। यही वजह है कि उत्तर भारत में केवल सुहागन महिलाएं ही नहीं बल्कि कुंवारी कन्याएं भी तीज व्रत रखती है। कथनानुसार हरितालिका तीज के दिन ही भगवान शिव ने पार्वती को पत्नी रूप में स्वीकार किया था। अखंड सौभाग्य का प्रतिक यह त्यौहार भारतीय परंपरा में पति-पत्नी के प्रेम को और प्रगाढ़ बनाने तथा आपस में श्रद्धा और विश्र्वास कायम रखने का त्यौहार है। इसके अलावा यह पर्व पति-पत्नी को एक दूसरे के लिए त्याग करने का संदेश भी देता है। इस दिन कुंवारी कन्याएं भी व्रत रखकर अपने लिए शिव जैसे वर की कामना करती है। विवाहित महिलाएं अपने सुहाग को भगवान शिव तथा पार्वती से अक्षुण बनाए रखने की कामना करती हैं।

सोमवार को निर्जला व्रत, मंगलवार को पारण :

हलांकि सुहागिनों का मुख्य व्रत तीज व्रत की उत्तम पूजन तिथि को लेकर इस बार थोड़ा संशय था। कुछ पंचाग 01सितंबर तो कुछ महत्वपूर्ण पंचाग 02 सितंबर को तीज व्रत बता रहे हैं। इस तरह की स्थिति करीब 23 वर्षों के बाद उत्पन्न हुई है। हलांकि विद्वानों ने संशय दूर कर 02 सितंबर को ही तीज मनाने पर सहमति प्रदान की है। श्रीसीताराम वेद वेदांग शिक्षण अनुसंधान केंद्र सह संस्कृत गुरुकुल, रिविलगंज के प्राचार्य व आचार्य विकास कुमार पाण्डेय ने बताया की हरितालिका तीज 02 सितंबर को मनना ही शास्त्र सम्मत है। कुछ पंचांगों में 01 सितंबर को तृतीया का क्षय है तो कुछ पंचांगों में तृतीया का मान 02 तारीख को भी है। काशी द्वारा प्रकाशित प्रायः सभी पंचांगों में तृतीया का मान 02 सितंबर को 09:01 बजे तक दिया गया है। जिन पंचांगों में तृतीया तिथि का क्षय है वे नाटिकल अलमानेक के द्वारा बनाए गाय दृश्य पंचांग है। जबकि पारंपरिक रीति से निर्मित पंचांगों में तृतीया का मान 02 सितंबर को 9:01 तक है। आचार्य विकास कुमार पाण्डेय ने बताया की काशी से प्रकाशित सभी पंचांगों में तृतीया तिथि का मान 02 सितंबर को 9:01 बजे ताक होने से 02 सितंबर 2019 को ही हरितालिका तीज मनाई जानी चाहिए। क्योंकि निर्णय सिंधु में यह स्पष्ट वर्णित है कि ” मुहूर्तमात्र सत्वेपि दिने गौरी व्रतं परे पुनश्च चतुर्थी सहीता या तु सा तृतीया फलप्रदा। अवैधव्यकर स्त्रीणां पुत्र-पौत्रप्रवर्धिनी ” लिखते हुए धर्मशास्त्र के ग्रंथों में द्वितीया युक्त तृतीया का प्रतिकार भी किया गया है। इसलिए हम सब के लिए 02 सितंबर 2019 को ही हरितालिका तीज व्रत रखना शास्त्र सम्मत है।

तीज पूजा विधि:-

तीज के दिन निर्जला व्रत और भगवान शिव और माता पार्वती जी की विधिपूर्वक पूजा करने का विधान है। इस दिन व्रत के साथ- साथ शाम को व्रत की कथा सुनी जाती है। माता पार्वती जी का व्रत पूजन करने से धन, विवाह संतानादि भौतिक सुखों में वृद्धि होती है। आचार्य विकास कुमार पाण्डेय के अनुसार मंगलवार की प्रातः 4:00 बजे से लेकर 5:45 के पहले व्रतियों को पारण कर लेना शुभकर है।

(संपादन : के. के. सिंह सेंगर)

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