“अज्ञातवास” के बावजूद लगी लोकतंत्र की प्यास!! इस प्यास को बुझाने के लिए लोकतंत्र के महापर्व में डूबकी लगाने आ गया : ब्रज नंदन जायसवाल,

“अज्ञातवास” के बावजूद लगी लोकतंत्र की प्यास!! इस प्यास को बुझाने के लिए लोकतंत्र के महापर्व में डूबकी लगाने आ गया : ब्रज नंदन जायसवाल,
=================

रिपोर्ट : विजय तिवारी/कमल सिंह सेंगर, अम्बालिका न्यूज,

गोपालगंज (बिहार) : सफेद बालों व दाढ़ी में एक चिंतक व विचारक सा दिखने वाला चेहरा! लगभग पांच सालों बाद जो नजर आया है! कभी शहर का चिरपरिचित ही नहीं, सर्वाधिक लोकप्रिय भी! जो अचानक गायब हो गया! ठीक उसी तरह, जिस प्रकार नरेन्द्र मोदी भी कुछ दिनों के लिए अज्ञातवास पर चले गए थे! कुछ लोग पहचानते ही पास आ गए!जायसवाल जी! सवालों को अनजान बनकर आगे बढ़ जाने की कोशिश! लेकिन एक नहीं, कई अन्य लोगों की एक साथ आवाज! जायसवाल जी!! पहचान छुपा नहीं सके! मुस्कुराकर हां की सहमति भरी!
कहा–लोकतंत्र के महापर्व में सहभागी बनकर लोकतंत्र के जड़ों को सिंचने आया हूं!दर्जनों लोगों के मुंह से बस एक प्रश्न–क्यों भाजपा छोड़ दिया! हंसते हुए–भाजपा के जिस पद पर हूं, उस पद का नाम है कार्यकर्ता! राम नाम सत्य है के साथ ही, यह खत्म होगा!
लोकतंत्र के महापर्व की महत्ता बताने लगे। मतदान करने का अर्थ किसी दल विशेष का पक्ष भर लेना नहीं है। बल्कि एक जागरूक व जिम्मेवार नागरिक का फर्ज निर्वहन भी है। बूथ पर उपस्थिति स्थापित करने का अर्थ है–देश, दल और विचारों के प्रति आज भी उतना ही सजग, जितना कल था!पांच साल पर आने वाले इस पर्व में शामिल होकर खुशी, गौरव एवं संतुष्टि की अनुभूति होती है।
भाजपा के वरीय नेता ब्रजनंदन जायसवाल आज से पांच साल पहले जिला भाजपा के व्यवहार व कार्यपद्धति से खिन्न होकर अज्ञातवास पर चले गए थे। यह अज्ञातवास उनके लिए आत्मचिंतन व आत्ममंथन का मार्ग बन गया। वे रामेश्वरम से लेकर कन्याकुमारी तक, पूर्वोत्तर कामाख्या मंदिर से लेकर आदि शंकराचार्य मंदिर तक भटकते रहे। हिमालय की पहाड़ियों से लेकर राजस्थान के रेगिस्तान तक राष्ट्रहित में ज्ञान व चिंतन करते रहे। पांच साल बाद लोकतंत्र के जड़ों में पानी डालने आए हैं। पर बातों से ऐसा लग रहा उनका आत्मचिंतन, आत्ममंथन और दल के स्थानीय कार्य व्यवहार से खिन्नता का दौर समाप्त नहीं हुआ है।

 

Advt.

Advt.

W. J. A. I. संगठन का लोगो

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

*