विश्व महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर आयोजित हुए कार्यक्रम, रिद्धि-सिद्धि सेंट्रल स्कूल नचाप में हुआ नाटक का मंचन

विश्व महिला दिवस के अवसर पर विभिन्न स्थानों पर आयोजित हुए कार्यक्रम, रिद्धि-सिद्धि सेंट्रल स्कूल नचाप में हुआ नाटक का मंचन

प्रो. अजीत कुमार सिंह/वीरेश सिंह, अम्बालिका न्यूज ब्यूरो,

छपरा/मांझी (सारण) : क्षेत्र के विभिन्न स्थानों पर शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस धूमधाम के साथ मनाया गया। इसी क्रम में क्षितीश्वर नाथ सिंह ट्रस्ट की ओर से संचालित रिद्धि सिद्धि सेंट्रल स्कूल के प्रांगण में ट्रस्ट के अध्यक्ष परमेश्वर सिंह की अध्यक्षता में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर विविध कार्यक्रम आयोजित किए गए।


इस दौरान छात्राओं की ओर से महिला सशक्तिकरण से संबंधित एक नाटक की प्रस्तुति की गई। जिसे मौजूद शिक्षकों ने काफी सराहना की। कार्यक्रम का संचालन स्कूल के निदेशक राकेश कुमार सिंह ने किया।


इस मौके पर स्कूल के प्राचार्य दशरथ साह, मुकेश कुमार सिंह, दीपक सिंह, प्रमोद ठाकुर, आशुतोष सिंह, अविनाश श्रीवास्तव, गजेंद्र मिश्रा, अरविंद श्रीवास्तव, महमूद आलम, गायत्री सिंह, खुशबू सिंह, अर्पणा सिंह, अनामिका दुबे, पूजा सिंह, दीक्षा सिंह आदि ने विश्व महिला दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में अपने-अपने अपने विचार व्यक्त किए।

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उत्क्रमित मध्य सह उच्च माध्यमिक विद्यालय गौसपुर में भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस मनाया :

इसी क्रम में उत्क्रमित मध्य सह उच्च माध्यमिक विद्यालय गौसपुर में भी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस समारोह प्रधानाध्यापिका वीणा सिंह की अध्यक्षता में मनाया गया।

जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवता निवास करते हैं : परमेश्वर सिंह

एकमा (सारण) : शास्त्रों व धर्म ग्रंथों में भी वर्णन है कि जहां नारी का सम्मान होता है, वहां देवता भी निवास करते हैं। आज के दौर में हम सब बराबरी की बात तो करते हैं। लेकिन स्त्री व पुरुष के बीच बराबरी की बात पर पुरुष का अहंकार आड़े आ जाता है। यह अहंकार हमारे समाज के पुरुषों की अपनी झूठी शान है।

यह बात नचाप गांव स्थित रिद्धि-सिद्धि स्कूल के परिसर में शुक्रवार को क्षितीश्वर नाथ सिंह ट्रष्ट के अध्यक्ष परमेश्वर सिंह ने कही। उन्होंने कहा कि इसमें वह अपने आप को नारी से श्रेष्ठ समझता है। ज्ञानवान व्यक्ति में भी जहां नारी की बात आती है, वह अपने आपको नारी से श्रेष्ठ सिद्ध करने में लग जाता है।

उन्होंने कहा कि नारी जीवन जीने की कला सिखाती है। नारी द्वारा कठिनाइयों में भी अपने परिवार को संभालने की शक्ति, समर्पण, सहनशीलता का कोई मुकाबला नहीं कर सकता है। महालक्ष्मी, सरस्वती व दुर्गा के रूप में तो पुरुष नारी को उच्च स्थान देता है। लेकिन घर की बात जब आती है तो वह यह बात भूल जाता है। इसलिए पुरुषों को अपनी इस मानसिकता को बदलनी होगी। तभी असल में विश्व महिला दिवस मनाने की प्रासंगिकता सफल होगी।

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